वर्तमान में बच्चों में संस्कार हीनता के लिए जिम्मेदार कौन है ? श्रद्धा हत्याकांड!!!!


 बात जब संस्कार हीनता की हो रही है तो  उन सभी पहलू  पर गौर करना आवश्यक है। सबसे पहले बात करते हैं संस्कारहीनता की,संस्कार हीनता  है क्या?  वर्तमान में दिल्ली में श्रद्धा हत्याकांड  पर लगातार लोग चर्चा कर रहे हैं। इसके लिए  जिम्मेदार कौन है ? श्रद्धा एक ऐसी लड़की थी जो 25 वर्ष की आयु होने के पश्चात अपने आप को पूर्ण स्वतंत्र मानती  हैं ,उसे ऐसा लगता है जैसे उसके माता-पिता का जिन्होंने उसे बचपन से पाला उनका उस पर कोई अधिकार नहीं है और उसके लिये परिवार या समाज की कोई भी राय उसके लिए मायने नहीं रखते रखती।  स्वतंत्रता का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप समाज को गंदा करें । श्रद्धा हत्याकांड के उपरांत बहुत सारे प्रश्न खड़े हो गए हैं क्या सभी जिम्मेदारियां माता-पिता की होती हैं ?, क्या बच्चों की कोई जिम्मेदारी नहीं है। जो माता-पिता बच्चों को पालन पोषण करते हैं बड़े होने के उपरांत उनका कोई अधिकार नहीं रहता है ।क्या बुढ़ापा आने के पश्चात माता-पिता की जिम्मेदारी उठाना बच्चों की जिम्मेदारी नहीं है? चाहे लड़का हो या लड़की  सभी एक समान है उसमें असमानता कैसे आ सकती हैं ।क्या बेटी अपने माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं उठा सकती लेकिन जब लड़का लड़की समान है तो जिम्मेदारी भी समान है।संस्कार कोई 1 दिन में दी जाने वाली दबा का सीरप नहीं है जिसे बच्चों को पिला दिया जाए और बच्चे ठीक हो जाए।

 संस्कार देना माता-पिता की जिम्मेदारी है और मात्र 1 दिन में संस्कारवान बच्चा नहीं बनाया जा सकता उसके लिए माता-पिता को कड़ी मेहनत और तपस्या की आवश्यकता होती है बच्चों को अनुशासन बनाए रखने के उन पर नजर बनाए रखना होता है ।

जो माता-पिता अपने बच्चों को संस्कार नहीं देते ऐसे बच्चे धीरे धीरे स्वतंत्रमार्गी हो जाते है और धीरे-धीरे वह परिवार ,समाज या अपने माता-पिता की बातों को तवज्जो नहीं देते ।वह केवल अपने आप को ही सही मानते हैं उसी के अनुसार निर्णय लेते हैं । संस्कारहीनता के कारण बच्चे बिगड़ैल, अपराधी भी बन सकते हैं ।

इस सब के लिए कहीं ना कहीं परिवार और बच्चों के साथ साथ उनके माता-पिता भी जिम्मेदार होते हैं जो अपने घरेलू, ऑफिशियल अन्य कारणों से बच्चों का ध्यान नहीं देते उनकी आवश्यकताओं को जो मानने वाली हैं वह भी जो न मानने वाली है वह भी सभी को पूरा करते रहते हैं ।

 आवश्यकता से अधिक अधिक धन खर्च करने के लिए देते हैं और उसके उपरांत बच्चे कहां ,  कैसे ,किस लिए धन धन खर्च करते है उसकी कोई जानकारी नहीं लेते क्योंकि धन तो है परंतु कुछ माता पिता के पास अपने बच्चों से बात करने उन्हें समझाने समझने के लिए समय नहीं। बच्चे धीरे-धीरे संस्कारहीन होते चले जाते हैं । बच्चों को लगता है वह जो कर रहे हैं वह सब ठीक हैं वह दूर तक नहीं सोचते इस कारण गलत निर्णय लेते जाते हैं और एक समय ऐसा आता है कि वह गलत निर्णय कारण नित्य नई समस्याओं में घिर जाते हैं ।जब परेशानियां हद से अधिक हो जाती है तब माता-पिता को  याद आता है और उन्हें तब लगता है कि काश अपने बच्चों को सही से  परवरिश कर पाते या संस्कार दे पाते लकिन तब तक बहुत  देर हो जाती है और सब कुछ उनके हाथ से रेत के समान  फिसल कर निकल जाता है । जब बच्चे छोटे हो तभी से बच्चों पर हमें ध्यान देना चाहिए और उनको अच्छे संस्कार देना चाहिए ताकि ऐसे लोगों से बचा सके  जो इस फिराक में रहते हैं कि इन बच्चों को कैसे बिगाडा जाए ,बर्बाद किए जाए या फसाया जाए ।माता-पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चों से नियमित उनकी दिनचर्या पर बातें करें और उनकी समस्याओं को ध्यान से सुने और उनकी  समस्या समाधान में मदद करें ,बच्चे को स्वतंत्रता दें ,खेलने का अधिकार दें अपनी बात रखने का अधिकार दें किंतु यह सभी अधिकार देने से पूर्व एक काल्पनिक रेखा भी  खींचे कि इससे अधिक इससे अधिक आगे जाने पर बच्चे को रोका जाएगा। आवश्यकता से अधिक धन खर्च करने के लिए देना बच्चों को बर्बाद करता है , आवश्यकता से अधिक धन देना बच्चों को बर्बादी के रास्ते पर लेकर जाता है इसलिए आवश्यकतानुसार ही  धन खर्च करने के लिए दें।बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करें उनकी बातों को सुने समझेकिंतु माता-पिता और बच्चों के बीच में मान सम्मान का जो धागा होता है वह हमेशा बना रहना चाहिए और थोड़ा डर भी होना चाहिए । बिना मान सम्मान और डर के कुछ भी संभव नहीं है हम सभी को अपने बच्चों को हंसाने ,खेलने के लिए अपना कुछ समय बच्चों को अवश्य देना चाहिए और उन्हें अपने महान  देश के महान लोगों की जीवनी के बारे में बताना चाहिए।

 देशभक्तों के बारे में बताना चाहिए मोबाइल कम से कम इस्तेमाल करने के लिए देना चाहिए ।आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल   खतरनाक होता है।अगर आप दो रोटी के स्थान पर चार रोटी खाएंगे तो आपका पेट खराब  होना लाजमी है उसी प्रकार से यदि हम आवश्यकता से अधिक विभिन्न साधन बच्चों को जैसे मोबाइल ,टीवी ,लैपटॉप आदि का स्तेमाल करने को देंगे तो उसका भी साइड इफेक्ट हमें देखने को मिलेगी। बच्चों को जन्म देकर उनको पालना बहुत बड़ी और लंबी प्रक्रिया होती है जिसमें आप लापरवाही नहीं कर सकता अगर आप लापरवाही करेंगे तो उसके साइड इफेक्ट आपको देखने को मिलेंगे । अपने बच्चों को संस्कार दीजिए संस्कारवान बनाइए ,अच्छे संगत दीजिए अच्छे विचार उनके मन मे लाइए ,खुल कर बात कीजिए, समस्याओं का समाधान कीजिए ,आवश्यकता अनुसार ही धन देना चाहिए उनके के बारे में और उनके दोस्तो के विषय में जानकारी रख कर समाज के जालिम और भूखे भेड़ियों से अपने बच्चों एवम परिवार को बचाइए।

जय हिंद

रविन्द्र कश्यप






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